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भारत-ब्रिटेन एफटीए एक ऐतिहासिक समझौता, निर्यात और प्रतिस्पार्धात्मक क्षमता बढ़ेगी : नाबार्ड चेयरमैन

भारत-ब्रिटेन एफटीए एक ऐतिहासिक समझौता, निर्यात और प्रतिस्पार्धात्मक क्षमता बढ़ेगी : नाबार्ड चेयरमैन

भारत-ब्रिटेन एफटीए एक ऐतिहासिक समझौता, निर्यात और प्रतिस्पार्धात्मक क्षमता बढ़ेगी : नाबार्ड चेयरमैन मुंबई, 16 जुलाई। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक ऐतिहासिक समझौता है, जो निर्यात को बढ़ावा देगा, भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा और दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा। यह बयान राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के चेयरमैन डॉ. शाजी कृष्णन वी ने गुरुवार को कही।


बातचीत में नाबार्ड अध्यक्ष ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इसके तहत कई भारतीय उत्पादों को जीरो-ड्यूटी के साथ बाजार तक पहुंच मिलेगी, जबकि अन्य उत्पादों पर शुल्क में कमी की जाएगी।


उन्होंने कहा, "आर्थिक दृष्टि से यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, क्योंकि कई उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी पहुंच मिलेगी और अन्य पर शुल्क कम होगा। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक व्यापक समझौता है, जिसमें व्यापार, निवेश, सेवाएं और प्रौद्योगिकी शामिल हैं।"


उनके अनुसार, बाजार तक बेहतर पहुंच और आर्थिक उदारीकरण से भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता सुधारने और कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलेगी।


उन्होंने कहा, "अब सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के भीतर ऐसा सक्षम माहौल तैयार किया जाए, जिससे भारत इस ऐतिहासिक समझौते का पूरा लाभ उठा सके।"


नाबार्ड की बदलती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए चेयरमैन ने कहा कि संस्था अब केवल ऋण उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में तरलता बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था के रूप में उभर रही है।


उन्होंने से कहा, "नाबार्ड खुद को ग्रामीण अवसंरचना के वित्तपोषक के रूप में स्थापित कर रहा है और साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में निवेश की कमियों की पहचान करने में भी मदद कर रहा है।"


उन्होंने बताया कि संस्था कृषि मूल्य श्रृंखलाओं (एग्रीकल्चर वैल्यू चेन) का मानचित्रण कर रही है, ताकि उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और वितरण में निवेश के जरिए टिकाऊ आजीविका का सृजन सुनिश्चित किया जा सके।


शाजी ने कहा कि नाबार्ड किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और सहकारी संस्थाओं के साथ मिलकर उनकी क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी मजबूत करने के लिए भी काम कर रहा है।


इन प्रयासों के तहत अब तक करीब 70,000 प्राथमिक सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।


उन्होंने कहा कि संस्थागत सुधार और क्षमता निर्माण की पहल नाबार्ड को केवल एक वित्तीय संस्था नहीं, बल्कि संस्थान निर्माण करने वाली और टिकाऊ ग्रामीण विकास को गति देने वाली संस्था में बदल रही है।

Amanat Arora | July 16, 2026 | Technology | Business


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