पंजाब में न*शे की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर कार्रवाई लगातार चर्चा में है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के छह जिलों को ड्र*ग्स के मामले में अति-संवेदनशील जिलों की श्रेणी में चिन्हित किया गया है। यह पहचान केंद्र की 2029 तक भारत को ड्र*ग-फ्री बनाने की योजना से जुड़ी है।
न*शे के खिलाफ कार्रवाई पंजाब के लिए लंबे समय से प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक मुद्दा रही है। राज्य में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ न*8शा मुक्ति, पुनर्वास और युवाओं को इस समस्या से दूर रखने जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया जाता रहा है।
केंद्र की प्रस्तावित रणनीति में उन क्षेत्रों की पहचान पर जोर दिया जा रहा है जहां न*शीले पदार्थों की तस्करी और इस्तेमाल से जुड़ी चुनौती अधिक गंभीर मानी जाती है। पंजाब के छह जिलों का अति-संवेदनशील श्रेणी में आना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया गया है।
किसी जिले को संवेदनशील श्रेणी में रखने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और संदिग्ध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित करने की जरूरत होती है। पंजाब की भौगोलिक स्थिति भी इस मामले में महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब है।
हालांकि, न*शे की समस्या को केवल पुलिस कार्रवाई से खत्म करना संभव नहीं माना जाता। न*शे की गिरफ्त में आ चुके लोगों के इलाज और पुनर्वास के साथ परिवारों और स्थानीय समुदायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
सरकारों की योजनाओं की वास्तविक सफलता का आकलन केवल गिर*फ्तारि*यों की संख्या से नहीं बल्कि न*शे की उपलब्धता, नए मामलों, उपचार की पहुंच और पुनर्वास के परिणामों से भी किया जा सकता है।आने वाले समय में इन छह जिलों में प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर जागरूकता और न*शा मुक्ति कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है।